डॉ. सम्पूर्णानन्द तिवारी ने लखनऊ विश्वविद्यालय से बी.ए., एम.ए. और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने 'आस्तिक दर्शनों के आलोक में योगवासिष्ठ का समीक्षात्मक अध्ययन' विषय पर शोध प्रबंध प्रस्तुत कर पीएचडी पूरी की तथा वे नेट (NET) परीक्षा भी उत्तीर्ण कर चुके हैं। वर्ष 2008 से 2015 तक उन्होंने राजकीय महाविद्यालय, पचपेड़वा, बलरामपुर में संस्कृत अध्यापन का कार्य किया। उनके लेख कई नेशनल जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं और उन्हें नेशनल मेरिट स्कॉलरशिप से भी सम्मानित किया गया था।
यह पुस्तक नाथ सम्प्रदाय का विस्तृत अध्ययन करती है। यह सम्प्रदाय के दार्शनिक आधारों, प्राचीनता, उत्पत्ति, और इसकी साधना पद्धति के विभिन्न पहलुओं की विवेचना करती है। पुस्तक यह तर्...
यह पुस्तक भारतीय काव्यशास्त्र के छः प्रमुख सम्प्रदायों—अलङ्कार, रस, औचित्य, वक्रोक्ति, रीति और ध्वनि—का अध्ययन करती है। पुस्तक का मुख्य तर्क यह है कि काव्यशास्त्रीय सिद्धान्तों...