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निराला-काव्य और वक्रोक्ति सिद्धांत

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निराला-काव्य और वक्रोक्ति सिद्धांत

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Author
डॉ. मीरा शर्मा
Publisher
Akhand Publishing House
Categories
Best Sellers, Hindi Sahitya
ISBN
9788199639133
Edition
2026
Format
Hard Bound
Size
Demy
Pages
336

Description

यह ग्रन्थ भारतीय तथा पार्चाच्य काव्यशास्त्र के दृष्टिकोण से ‘वक्‍त’ और ‘वक्‍रोक्त’ के सिद्धान्तों का विश्लेषण करता है। प्रथम अध्याय में वक्‍त के स्वरूप, शब्दार्थ और गुणों की विवेचना की गई है, तथा कृतक के पूर्ववर्ती विचारों से उसका संबंध स्थापित किया गया है। द्वितीय अध्याय में अन्य भारतीय तथा पार्चाच्य काव्य सिद्धान्तों के साथ तुलना कर अलंकार, रस, ध्वनि, रीति, औचित्य आदि के सापेक्ष वक्‍त की स्थिति स्पष्ट की गई है। तृतीय अध्याय में वर्ण‑विन्यास‑वक्‍त के अध्ययन के माध्यम से काव्य की आकर्षकता पर प्रकाश डाला गया है। चौथा और पाँचवाँ अध्याय क्रमशः पद‑पूर्णांध‑वक्‍त तथा पद‑पराध‑वक्‍त के गुणों और उनके काव्य में योगदान पर चर्चा करते हैं। छठा अध्याय वस्तु‑वक्‍त के स्वरूप और उसके विविध प्रकारों को उदाहरणों के साथ प्रस्तुत करता है। सातवाँ अध्याय काव्य के लिए वक्‍त की आवश्यकता और उसके महत्व को रेखांकित करता है, जबकि आठवाँ अध्याय काव्य‑वक्‍त की अनिवार्यता और काव्य की सफलता में उसकी भूमिका पर बल देता है। संपूर्ण ग्रन्थ में काव्य के सौंदर्य, अर्थ और अभिव्यक्ति के बीच संतुलन स्थापित करने हेतु वक्‍त और वक्‍रोक्त के सिद्धान्तों का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।