अस्मितामूलक साहित्य एवं आंदोलन
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- Authors
- डॉ. अखिलेंद्र प्रताप सिंह, शालिनी रत्नाकर, डॉ. प्रेमलता
- Publisher
- Akhand Publishing House
- Categories
- Hindi Sahitya, Literature, Social Science
- ISBN
- 9788193934333
- Edition
- 2019
- Format
- Hard Bound
- Size
- Demy
- Pages
- 354
Description
डॉ. कर्मानंद आर्य द्वारा लिखित यह पुस्तक समकालीन आदिवासी कविता और उसके विविध आयामों का अध्ययन प्रस्तुत करती है। हिंदी साहित्य के इतिहास में पहली बार दलित और आदिवासी रचनाकारों की एक नई पीढ़ी का अभ्युदय हुआ है, जो सदियों से संतप्त और हाशिये पर धकेल दिए गए समुदायों के स्वरों को मुखर करती है। पुस्तक में इस बात का विश्लेषण किया गया है कि कैसे आदिवासी साहित्य को मात्र मौखिक लोक साहित्य, अनगढ़ कला या केवल प्रतिरोध के साहित्य के रूप में सीमित करने की कोशिशें की जा रही हैं, जिनका आदिवासी रचनाकार मुखर विरोध कर रहे हैं।
यह ग्रंथ आदिवासी साहित्य की अवधारणा को रेखांकित करता है जिसमें व्यक्तिगत जीवन के स्थान पर सामूहिक जीवन-दर्शन की सनातन परंपरा निहित है। इसके साथ ही, पुस्तक में साहित्य, समाज और राजनीति के परस्पर संबंधों पर भी प्रकाश डाला गया है। इसमें दर्शाया गया है कि समाज और संस्कृति राजनीति का आधार होते हैं और साहित्य समाज को बदलकर राजनीति से संघर्ष करता है। यह कृति वर्चस्ववादी विचारधाराओं द्वारा अस्मितावादी उभारों के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों का अध्ययन करती है।