इक्कीसवीं सदी के हिंदी साहित्य में किसान और मजदूर विमर्श
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- Author
- डॉ. सुनिल चव्हाण
- Publisher
- Akhand Publishing House
- Categories
- Hindi Sahitya, Nonfiction, Social Science
- ISBN
- 9789390870097
- Edition
- 2021
- Format
- Hard Bound
- Size
- Demy
- Pages
- 168
Description
यह पुस्तक लॉकडाउन के दौरान समाज के सबसे कमजोर वर्गों, विशेषकर किसानों और मजदूरों पर पड़े गंभीर प्रभावों का अध्ययन करती है। पुस्तक में यह दर्शाया गया है कि कैसे उद्योगों के बंद होने, बाजारों के ठप पड़ने और कृषि उपज के नष्ट होने से किसानों और मजदूरों को दोहरी मार झेलनी पड़ी। कर्ज के बोझ से किसानों की बर्बादी, कारखाने बंद होने से मजदूरों की भुखमरी और शहरों से उनके पलायन की दर्दनाक स्थितियों का इसमें चित्रण है। पैदल यात्रा के दौरान मजदूरों की मौत, रास्तों में बच्चों के जन्म और मृत्यु जैसी त्रासदियों को भी रेखांकित किया गया है। इसके साथ ही, महामारी के समय चिकित्सा कर्मियों, पुलिस प्रशासन और शासन व्यवस्था के प्रयासों के बीच किसानों की बढ़ती आत्महत्याओं, परिवारों के बिखरने और सरकारी सहायता के लिए बैंकों के बाहर लंबी कतारों में खड़े लोगों के संघर्ष को उठाया गया है। यह कृति सरकारी यंत्रणाओं की विफलताओं और किसानों-मजदूरों की दयनीय स्थिति का यथार्थवादी चित्रण प्रस्तुत करती है। यह AKHAND द्वारा प्रकाशित है।