नाथपन्थ और योगवासिष्ठ
आस्तिक दर्शनों के आलोक में
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- Author
- डॉ. सम्पूर्णानन्द तिवारी
- Publisher
- Akhand Publishing House
- Categories
- Hindi Sahitya, Nonfiction, Religion and Spirituality
- ISBN
- 9789388998291
- Edition
- 2019
- Format
- Hard Bound
- Size
- Demy
- Pages
- 112
Description
यह पुस्तक नाथ सम्प्रदाय का विस्तृत अध्ययन करती है। यह सम्प्रदाय के दार्शनिक आधारों, प्राचीनता, उत्पत्ति, और इसकी साधना पद्धति के विभिन्न पहलुओं की विवेचना करती है। पुस्तक यह तर्क देती है कि यद्यपि नाथ लेखकों के ग्रंथों में दार्शनिक सिद्धांतों का स्पष्ट उलझाव नहीं मिलता, फिर भी उनकी संपूर्ण योग साधना के मूल में दार्शनिक आधार सदैव विद्यमान रहे हैं। यह ग्रंथ नाथ योग की परंपरा, उसके शिव-शक्ति के स्वरूप, तथा उपनिषदों और वेदों से उसके संबंधों का अन्वेषण करता है। इसमें पशुपत, कापालिक, शाक्त, और रसेश्वर जैसे संप्रदायों के साथ नाथ पंथ के संबंधों और ऐतिहासिक साक्ष्यों पर भी प्रकाश डाला गया है। इसके अलावा, पुस्तक गोरक्षनाथ और मत्स्येंद्रनाथ के काल-निर्णय, उनके ऐतिहासिक व अर्ध-ऐतिहासिक आधारों, तथा कदली देश या स्त्रीदेश से जुड़ी कथाओं का विश्लेषण करती है। अंततः, यह ग्रंथ स्पष्ट करता है कि तांत्रिकों और सिद्धों के आचारों के पतन के बाद यौगिक क्रियाओं के उद्धार के लिए नाथ सम्प्रदाय का उदय हुआ था, जिसे विभिन्न नामों से जाना जाता रहा है।